Increment ની રમત

ઈંક્રેમેન્ટ એટલે આમ સીધા શબ્દો માં કહીએ તો પગારમાં વધારો અને બીજી રીતે કહીએ તો તમારા વરસ ના કામ નું સરવૈયું એવો સમય જ્યારે તમને એવું જ લાગે કે તમને તમારા કામ નું વળતર નથી મળ્યું અને સાહેબ ને એવું જ લાગે છોકરા એ આપ્યા પ્રમાણે કામ નથી કર્યું આ સાહેબ અને છોકરા વચ્ચે ના…

Yes, I will!

    कॉलेज का था पहला साल और पहला था कल्चरल फेस्टिवल। जमी थी महफ़िल दोस्तों की वही केंटीन की बैच पे। ऊपर था पीपल का पेड़ और नीचे थी यारों की मस्तीभरी बाते। वही कुछ सीनियर मशगूल थे लैला मजनू के किरदार की रिहर्सल में। तभी अचानक प्रगट हुई एक लड़की सामने, न ज्यादा…

Try it! Write it!

Why we all are writing? Writing pages and pages whole year. Does it giving money to us? May be to some of us. But, obviously not all of us. So, why are we writing? May be because there is something which can’t be measured in monatory term. Everyone want to say something. Everyone wants there…

Let’s connect

Hi friends, We are in connected here from so long.. Let’s connect on insta.. Worm Welcome to my Insta page @soch_vichar See you there 🤗🙋😍

Mad Writers

We are mad! 🤣 Yes, we who write here on wordpress or there on Quora! We all are mad. Do you know why.. We are clueless. Don’t know why we are writing. We are writing on the sacrifice of our sleep 😴 For what? No any practical reason. Is it? It’s because you like. No,…

मार्ग चयन

वो जो मार्ग था, कुछ सरल नही था। बहुत कम लोग जाते थे वहां क्या मिलेंगा वो पता नही था। इसिलए तो कोई जा नही रहे थे कोई डर था लोगों में, हा, विश्वाश था, अगर सही तरीके से आगे बढ़े तो सफलता पक्की है। लेकिन शायद खुद पे उतना विश्वास नही था लोगो को।…

To All Writers

सुबह जल्दी उठना हो, फिर भी अगर देर रात तक जगे रहो सिर्फ कुछ शब्दों को लिखने के लिए, समज़ लो यही वो शोख है, जो तुम्हे खुश रखेगा। अगर वो देर रात तक लिखने के बाद, सुबह उठते ही अगर पहला खयाल आए, उस लिखावट के प्रति लोगो की प्रतिक्रिया का, समझ लो, हा…

No More #MeToo

Sand is going upwards.. It was 2 in the night. The sand just rested back after being in air almost 3-4 hours constantly. But, it again climbed up with laughter of some evil minded friends. It was a group of 4 guys joining 1 girl a college friend. Guys were started teasing her.. It was…

Nature के पास

निकले हम बिच जंगल से कही थे पर्वत, कही जाड़ी गिच कही वो मौसी माथे पे उठाये घास की गठरी। कही वो सड़क किनारे पेड़ से बंधी गाय, तो कही अपनी मौज में बीच राह बैठा वो कुत्ता। कही बकरी को चराते वो माजी कही दर्शन करने चलते हुए निकले भक्त। कही वो माँ की…

आज़ादी

आज भारत आज़ाद है। अपने दम पे खड़ा है। और भले ही जितनी सोची थी तरक्की जब आज़ाद हुए तब उतनी नहीं हुई, लेकिन फिरभी अछी तरक्की कर रहा है। लेकिन फिर भी में कई बार लोगो को बोलते सुनता हूँ की हमने ज्यादा तरक्की की होती अगर आज भी हम अंग्रेजो के गुलाम होते।…